जनमत भास्कर,छिंदवाड़ा:-शासन द्वारा नगर निगम से कॉलोनी विकास अनुमति प्राप्त वैध कॉलोनियों में 2000 वर्गफीट तक के भूखंडों पर भवन निर्माण के लिए पंजीकृत कंसलटेंट के माध्यम से डीम्ड बिल्डिंग परमिशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।इसी प्रक्रिया के अंतर्गत ABPAS 3.0 पोर्टल से जारी डीम्ड भवन अनुज्ञाओं की निगमायुक्त सी.पी. राय के निर्देश पर जांच की गई, जिसमें 17 फाइलों में अनियमितताएं सामने आई हैं।
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि वैध कालोनियों के खसरों का उपयोग करते हुए ग्रीन लैंड पर स्थित भूखंडों तथा पूर्व से निर्मित भवनों को डीम्ड परमिशन के अंतर्गत वैध दर्शाया गया।जांच में कंसल्टेंट द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के मिलान में वास्तविक स्थिति और अभिलेखों के बीच स्पष्ट अंतर पाया गया।कई प्रकरणों में निर्माण कार्य पहले ही पूर्ण हो चुका था,इसके बावजूद पूर्व अनुमति के बिना किए गए निर्माण को बाद में डीम्ड बिल्डिंग परमिशन प्रक्रिया में शामिल किया गया।
डीम्ड परमिशन प्रक्रिया स्वतः लागू होती है और इसमें पंजीकृत कंसलटेंट के आवेदन करने के उपरांत पोर्टल द्वारा फीस जनरेट की जाती है एवं फीस भुगतान करने के उपरांत डीम्ड परमिशन निकाली जा सकती है।नगर निगम के अधिकारियों अथवा कर्मचारियों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से कोई अनुमति जारी नहीं की जाती।जांच डीम्ड परमिशन के लिए प्रस्तुत किए गए तकनीकी दस्तावेज,भूमि उपयोग संबंधी विवरण तथा स्थल की वास्तविक स्थिति पर केंद्रित रही।इन 17 फाइलों की जांच में संबंधित कंसलटेंट्स की भूमिका भी सामने आई है।जिन कंसलटेंट्स के प्रकरण जांच में आए हैं,उनमें कुंदन साहू, तुकेश विश्वकर्मा,अतुल सक्सेना एवं शैलेन्द्र श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।जांच में पाया गया कि इनके द्वारा प्रस्तुत नक्शों एवं अभिलेखों में कई स्थानों पर भूमि की श्रेणी और निर्माण की स्थिति को लेकर विरोधाभास है।वैध कॉलोनी के नाम एवं खसरे का उपयोग करते हुए आवेदन किए गए,जबकि आवेदक का मूल खसरा क्रमांक वैध कॉलोनी की श्रेणी में नहीं आता था।निगम आयुक्त ने आम जन से अपील की है कि डीम्ड भवन अनुज्ञा लेते समय शासन की नियम एवं शर्तों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें ।
इन कंसल्टेंट के पंजीयन होंगे निरस्त
जांच के आधार पर संबंधित पंजीकृत कंसलटेंट कुंदन साहू,तुकेश विश्वकर्मा,अतुल सक्सेना एवं शैलेंद्र श्रीवास के पंजीयन निरस्त करने हेतु पत्र संचालनालय भेजा गया है।




