स्थानीय कुम्भकार प्रजापति समाज के मूर्तिकारों का आरोप…4 साल से शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन,नगर निगम और प्रदूषण विभाग मौन
पीओपी की मूर्तियों से होता है जल प्रदूषण साथ ही धार्मिक आधार पर भी मिट्टी की मूर्ति पूजा ही श्रेष्ठ
जनमत भास्कर,छिंदवाड़ा :- जिला प्रशासन और नगर निगम का दोहरा रवैया एक बार फिर सामने आया है।एक तरफ स्थानीय कुम्हार समाज को मिट्टी की मूर्तियां बनाने और POP की मूर्तियां न बनाने की हिदायत दी जा रही है,तो वहीं दूसरी तरफ बड़े व्यापारी धड़ल्ले से अमरावती सहित अन्य जगहों से POP की मूर्तियों से भरे ट्रक लाकर शहर में बेचने की तैयारी में हैं और प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है।
स्थानीय मूर्तिकारों ने मीडिया को बताया कि समाज के सभी लोग साल भर मिट्टी की गणेश,दुर्गा,लक्ष्मी जी की मूर्तियां बनाकर अपना जीवन यापन करते हैं।यह उनकी पूरे साल की जीविका है,लेकिन कुछ व्यापारी मोटे मुनाफे के लालच में अमरावती से POP की मूर्तियां ट्रक भर-भर कर ला रहे हैं और व्यापारी ग्राहकों से झूठ बोलकर POP की मूर्तियां बेच भी देते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि ये मूर्तियां पानी में गलती ही नहीं हैं और इससे भयंकर जल प्रदूषण भी होता है…प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी कागजों में POP मूर्तियों पर रोक की बात करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा कोई सख्त कार्यवाही नहीं की जाती।
मूर्तिकारों का कहना है कि वे पिछले चार साल से लगातार इस संबंध में प्रशासन को आवेदन दे रहे हैं लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन के इस दोहरे मापदंड से स्थानीय कुम्हारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। कुम्हार समाज ने मीडिया के माध्यम से मांग की है कि शासन इस मामले को संज्ञान में लेकर बाहर से आने वाली POP मूर्तियों पर सख्ती से रोक लगाए।




