ग्रामीण पर्यटन का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरे ग्राम में 09 होम स्टे…12 देशों के 300 पर्यटक पहुंचे

जनमत भास्कर,छिंदवाड़ा :- सतपुड़ा की वादियों में बसा आदिवासी ग्राम सावरवानी आज ग्रामीण पर्यटन और आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन चुका है, जिसकी गूंज अब देश ही नहीं,बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दे रही है।कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक संस्कृति तक सीमित यह छोटा सा गांव आज पर्यटन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित पर्यटन ग्राम सावरवानी ने महज 28 दिनों में 8 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर नया इतिहास रच दिया है,जो ग्रामीण विकास और जनभागीदारी की एक प्रेरणादायक सफलता गाथा बन गई है।

तामिया विकासखंड के सुदूर अंचल में स्थित सावरवानी ने 1 अगस्त से 28 अगस्त के बीच पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से यह रिकॉर्ड आय प्राप्त की है।होम स्टे,विलेज विजिट,बैलगाड़ी राइड,सैला नृत्य,ट्रैकिंग,ई-रिक्शा संचालन तथा स्थानीय उत्पादों जैसे देसी घी,चावल और सब्जियों की बिक्री से हुई इस आय ने गांव की तस्वीर बदल दी है।सबसे बड़ी बात यह है कि इस उपलब्धि का सीधा लाभ 100 से अधिक आदिवासी परिवारों तक पहुंचा है।
मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से विकसित सावरवानी आज ग्रामीण पर्यटन का सफल मॉडल बनकर उभरा है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

सावरवानी की सफलता केवल आय तक सीमित नहीं है।गांव को वर्ष 2023-24 में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम प्रतियोगिता में गोल्डन कैटेगरी का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।इसके अलावा गांव को फाइव ग्रीन लीफ रेटिंग तथा इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा पर्यटन ग्राम है जिसे जिम्मेदार और सतत पर्यटन के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

होम स्टे मॉडल ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था

करीब 300 घरों वाले इस आदिवासी गांव में वर्ष 2019 से पर्यटन गतिविधियों की शुरुआत हुई थी।मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से 14 जनवरी 2023 को यहां पहला होम स्टे प्रारंभ हुआ था।आज गांव में 9 होम स्टे सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं और मध्यप्रदेश में सर्वाधिक होम स्टे बुकिंग का रिकॉर्ड भी सावरवानी के नाम दर्ज है।अब तक 12 देशों के 300 से अधिक विदेशी पर्यटक यहां आ चुके हैं,जो गांव की वैश्विक पहचान का प्रमाण है।

आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास का प्रेरक उदाहरण

सावरवानी की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि स्थानीय संसाधनों,संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन से जोड़ा जाए तो गांवों में रोजगार,आय और विकास के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।आज सावरवानी केवल एक पर्यटन ग्राम नहीं,बल्कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को साकार करने वाला एक जीवंत उदाहरण बन चुका है।इसकी सफलता ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में देशभर के गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।