जनमत भास्कर,छिन्दवाड़ा :- बीते दिन निगम कार्यालय में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए महापौर विक्रम अहाके और नगर निगम आयुक्त सीपी राय के बीच कुछ विषयों पर तीखी बहस सामने आई।जिसके बाद मीडिया में दोनों ही जिम्मेदारों ने अपनी-अपनी बात रखी।

महापौर विक्रम अहाके ने कहाँ कि…”छोटे-छोटे कामों के लिए परेशान होना पड़ रहा है,जिससे शहर का विकास रुक रहा है।हालात नहीं सुधरे तो मैं नगर निगम में धरने पर बैठूंगा।”

इसी तरह निगम आयुक्त सीपी राय ने कहा कि… “जो काम नियमों में नहीं आते,वे नहीं हो सकते।हम शासन की गाइडलाइन से ही काम करेंगे।नियम के दायरे वाले सारे काम हो रहे हैं।”

ऐसे में अब बड़ा सवाल है कि- महापौर विक्रम अहाके ऐसा कौन सा काम निगम आयुक्त से करवा रहे हैं,जो नियमों में नहीं आते है। वहीं निगम आयुक्त ऐसे कौन से छोटे-छोटे काम भी नहीं कर पा रहे हैं,जिसके लिए स्वयं महापौर को चक्कर काटने पड़ रहे हैं?

विकास की बात या खटाई में सौदा ?

महापौर और निगम आयुक्त के बीच गरमा गरम बहस के बाद निगम का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है, बावजूद बहस को लेकर कानाफूसी अपने शबाब पर है।हर किसी की जबान पर बहस को लेकर कई मज़ेदार किस्से हैं।ऐसे ही एक कानाफूसी की माने तो- “गुरुवार दोपहर महापौर विक्रम अहाके निगम आयुक्त के पास स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत हुए एक कार्य के पेमेंट की फ़ाइल लेकर पहुंचे थे,जिसे निगम आयुक्त नियम विरुद्ध बता रहे हैं। इतना ही नहीं बहस के बीच एक अन्य विषय-“किसी व्यक्ति की निगम में नियुक्ति करने को लेकर भी” चर्चा ज़ोरों पर है। ऐसे में किसे सही माने किसे गलत ये पूरे निगम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।