जनमत भास्कर,छिंदवाड़ा :- नगर पालिक निगम छिंदवाड़ा सीमा क्षेत्रान्तर्गत बिना किसी सक्षम अनुमति के अवैध रूप से भूखंडों का क्रय-विक्रय कर अनाधिकृत कॉलोनियों का निर्माण करने वालों पर निगम प्रशासन का चाबुक लगातार चल रहा है। इसी कड़ी में नगर निगम आयुक्त चंद्रप्रकाश राय ने मौजा चंदनगांव और सिवनी प्राणमोती में दो पृथक-पृथक भू-स्वामियों द्वारा बिना डायवर्शन,बिना रेरा रजिस्ट्रेशन और बिना कालोनाइजर लाइसेंस के बनाई गई अवैध कॉलोनियों पर बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें ‘अनाधिकृत कॉलोनी’ घोषित कर दिया है।


प्राप्त विवरण के अनुसार, मौजा चंदनगांव निवासी रघुनाथ पिता तिमाजी पाटनकर द्वारा खसरा नंबर 14/3/1/1/1/1/1 (रकबा 0.1700 हेक्टेयर) भूमि पर सक्षम अधिकारियों से डायवर्शन व विकास की अनुमति लिए बिना छोटे-छोटे भूखंडों में विभक्त कर अनाधिकृत कॉलोनी का निर्माण कर विक्रय किया गया….वहीं दूसरे मामले में मौजा सिवनी प्राणमोती निवासी पूरन सिंह पिता शिव सिंह द्वारा खसरा नंबर 172/4/1/1/1/1/1/1 (रकबा 0.1430 हेक्टेयर) भूमि पर नियमों को ताक पर रखकर भूखंडों को विभक्त कर अवैध कॉलोनी का निर्माण व विक्रय किया गया।नियमानुसार किसी भी कॉलोनी में भूखंड विक्रय से पूर्व रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन,भूमि का व्यपवर्तन,कालोनाइजर लाइसेंस एवं कॉलोनी विकास की अनुमति अनिवार्य होती है,जिसका दोनों स्वामियों द्वारा पूर्णतः उल्लंघन किया गया।


राजस्व निरीक्षक मंडल एवं मौजा पटवारी के संयुक्त जांच दल के प्रतिवेदन और पंचनामे के आधार पर दोनों भू-स्वामियों को अंतिम सूचना पत्र जारी किए गए थे,किंतु संबंधितों द्वारा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।इसके बाद मध्यप्रदेश नगरपालिका (कॉलोनी विकास नियम 2021) के प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों भूमियों पर विकसित कॉलोनियों को तत्काल प्रभाव से ‘अनाधिकृत/अवैध कॉलोनी’ घोषित कर दिया गया है तथा संबंधितों के विरुद्ध पुलिस थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।


इस कड़ी कार्रवाई के साथ ही नगर निगम प्रशासन ने आम जनता से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी गाढ़ी कमाई से भूखंड (प्लॉट) खरीदते समय विशेष सावधानी बरतें और किसी भी अवैध या अनाधिकृत कॉलोनी में भूखंड का क्रय-विक्रय न करें।नागरिकों को सलाह दी गई है कि प्लॉट खरीदने से पूर्व संबंधित कॉलोनी के रेरा रजिस्ट्रेशन,कालोनाइजर लाइसेंस,भूमि के डायवर्शन एवं नगर निगम से स्वीकृत ले-आउट व विकास अनुमति संबंधी दस्तावेजों की भली-भांति जांच-परख अवश्य कर लें,ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी प्रकार की कानूनी व आर्थिक चपत से बचा जा सके।