न्यायालय की तल्ख टिप्पणी … सब कुछ पता चलने के बाद न्यायालय मूक दर्शन नहीं बना रह सकता…जांच अधिकारी ने कोर्ट में स्वयं माना स्कूटी की डिक्की में नहीं आ सकती 15 लीटर की केन

जनमत भास्कर,छिंदवाड़ा:-परासिया पुलिस द्वारा वर्ष 2020 में
दर्ज किए गए अवैध शराब के एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल डोंगरे ने तल्ख टिप्पणी करते हुए जांच अधिकारी और तत्कालीन टीआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद पूरे प्रकरण को झूठा करार देते हुए दोनों आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया है।

दरअसल 8 जुलाई 2020 को परासिया पुलिस ने मैग्जीन लाइन परासिया निवासी 30 वर्षीय संतोष पिता पूरनलाल डेहरिया और 34 वर्षीय रंजीत पिता पूरनलाल डेहरिया के विरुद्ध 54 लीटर अवैध शराब परिवहन का मामला दर्ज किया था।जांच अधिकारी ने आरोप लगाया था कि स्कूटी जुपिटर के सामने 22-22 लीटर शराब और स्कूटी की डिक्की में 15 लीटर की कुप्पी में शराब रखकर परिवहन किया जा रहा था।इस आधार पर दोनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था….इधर सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने न्यायालय के सामने स्वयं स्वीकार किया कि स्कूटी की डिक्की में 15 लीटर की कुप्पी समाना संभव नहीं है।इस आधार पर न्यायालय पूरे प्रकरण को झूठा मान रहा है। न्यायाधीश ने संतोष और रंजीत डेहरिया को मामले में बरी कर दिया।झूठे प्रकरण में संतोष डेहरिया को 51 दिन और रंजीत डेहरिया को 41 दिन जेल में रहना पड़ा था। पुलिस ने इस मामले में न्यायालय के सामने झूठा अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था।

दस धाराओं में अपराध दर्ज करने के निर्देश

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल डोंगरे ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि जब न्यायालय को सच्चाई का पता चल गया है तो वह मूकदर्शक नहीं बन सकता।न्यायालय ने जांच अधिकारी सुरेन्द्र सिंह राजपूत और तत्कालीन टीआई सुमेर सिंह जगेत के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 166, 167, 193, 196, 197, 198, 199, 200, 209 और 219 के तहत एफआईआर दर्ज करने के लिए कोतवाली टीआई को आदेशित किया है।